Pocketmoney Hindi Story

Pocketmoney पाॅकेटमनी – Hindi Story

[ आदि ने ढेर सारे पैसे इकट्ठे किए थे , नए स्केटिंग शूज़ भी मांगे । क्या कर रहा था वो ? नीरा शक के मारे परेशान थी , लेकिन जो आदि ने किया , शायद उसकी इजाज़त सीधे – सीधे तो नहीं मिल पाती । ]

पाॅकेटमनी

– रुपल राठौर

काफ़ी दिनों से देख रही है नीरा , बेटा आदि किसी न किसी बहाने मां से या पापा से लगभग रोज ही पॉकेटमनी की डिमांड करता । मां तो मना भी कर देती लेकिन पापा कभी लैपटॉप में व्यस्त होते तो पैसे खसका देते या कभी आदि की चटर – पटर से पीछा छुड़ाने के लिए उसके हाथ पर पैसे रख देते । मां नीरा के नाराज होने पर आदि मां के न रहने पर पापा से पॉकेटमनी लेता ।

‘ उफ्फ ! इतनी रात को आदि के कमरे की लाइट क्यों जल रही है ‘ बड़बड़ाती हुई नीरा ने जब बाहर की खिड़की से आदि के कमरे में झांका तो वह बड़े यलपूर्वक पैसे गिनकर एक डिब्बे में रख रहा था । जब उसने डिब्बा अलमारी में रख दिया , तब नीरा ने कमरे में कदम रखा और उसे लाइट बंद करके सोने का कहकर वह अपने कमरे में आ गई ।

नीरा की आंखों से नींद गायब थी । दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा । ‘ आखिर क्या करेगा इतने रुपयों का आदि ? कैंटीन से भी उसे ज्यादा खाने का शौक नहीं है , बाकी सब भी बोलने से पहले ही ला देते हैं फिर ये रुपए…? ‘

‘ राहुल देखिए न ! आदि , पैसे जमा कर रहा है , आप उसे अब पैसे न दिया करें , पता नहीं , वह इन रुपयों का क्या करेगा . . ? ‘ नीरा ने चिंतित होते हुए कहा ।

‘ अरे , आदि अब बच्चा नहीं है , वह पंद्रह साल का है । हर वक्त उसे बच्चे की तरह ट्रीट करना बंद करो , ज्यादा टोका – टाकी मत किया करो , विश्वास करना सीखो उस पर । बच्चे की कभी – कभी कुछ मन का करने की इच्छा होती होगी , खिलने दो उसे । ‘ राहुल ने नीरा को समझाते हुए कहा ।

‘ मम्मा , मेरे स्केटिंग वाले शूज स्कूल में कहीं रह गए , काफी दंढने पर भी नहीं मिले , अब मैं स्पोर्टस पीरियड में क्या पहनूंगा ? ‘ अगले दिन स्कूल से आते ही आदि ने कहा ।

‘ ऐसे – कैसे शूज गुम हो गए , तुमने कहीं रख दिए होंगे बेटा , पिछले तीन महीने पहले ही तो शूज दिलाए हैं । तुम अपनी चीजों का बिलकुल ध्यान नहीं रखते , बहुत लापरवाह होते जा रहे हो , पता नहीं , ध्यान कहां रहता है तुम्हारा ? ‘ गुस्से में नीरा का बड़बड़ाना जारी था । आश्चर्य की ही बात थी कि हमेशा जवाब देने वाला आदि सब कुछ सुन रहा था सिर नीचा किए , शांत भाव से । उसे इस तरह देखकर नीरा का गुस्सा शांत हो गया । आखिर एक ही तो बेटा है । जान – बूझकर तो फेंककर नहीं आया होगा . यही सोचकर उसने अगले दिन शाम को फिर से एक जोडी स्केटिंग शजला दिए ।

अगले दिन जब वह आदि के कमरे की सफाई कर रही थी तो अनायास ही उस सफेद डिब्बे पर नीरा की नजर पड़ी , जिसमें आदि पॉकेटमनी के पैसे जमा कर रहा था । उत्सुकतावश जब उसने उस डिब्बे को खोलकर देखा तो दंग रह गई , वह खाली था । दो दिन पहले तक कितने पैसे थे इस डिव्ये में कहा किसी बुरी संगत में तो नहीं पड़ गया ? अब उसका दिल जोर – जोर से धड़कन लगा , तभा उसकी नजर बेड के नीचे पड़े एक शूज पर गई । देखा यह तो आदि के स्केटिंग शूज है , उफ्फ । सिर चकराने लगा नीरा का . . . अब यह लड़का झूठ भी बोलने लगा है । जो भी हो , आज के आज ही स्कूल के प्रिंसिपल से मिलना होगा । नीरा तुरंत आदि के स्कूल पहुंच गई । प्रिंसिपल रूम में उसने अपना परिचय देते हुए पूछा , ‘ क्या स्कूल में किसी काम के लिए पैसे मंगवाए गए हैं ? ‘ ‘ आप आदि की मम्मा हैं ? ‘ जी ‘ बड़ी मुश्किल से निकला नीरा के मुंह से । अपनी बेसब्री पर वह मन ही मन पछता रही थी । ‘

मैम , आपके बेटे ने एक बहुत अच्छा काम किया है ‘ प्रिंसिपल सर ने कहा । ” उसकी कक्षा का ही एक बच्चा जिसके पापा इसी स्कूल में प्यून का काम करते हैं , मां सिलाई करती हैं , उसका काफी समय से ‘ स्केटिंग एक्टिविटी ‘ में भाग लेने का मन था । आपका बेटा उसे रोज आधे घंटे के लिए अपने शूज दे देता था । अब उसने अपनी पॉकेटमनी से स्टेट लेवल खेलने की फीस जमा कर दी है , साथ ही आप लोगों ने उसके दोस्त के लिए भी एक जोड़ी ‘ स्केटिंग शज ‘ ला दिए हैं । बेटे ने एक प्रतिभावान बच्चे का सपना पूरा करने का प्रयास किया है । कल उस बच्चे का जन्मदिन था । आपके बेटे ने उसे सच्ची खुशी दी है । अगले हफ्ते वह भी ग्रप के साथ बाहर खेलने जा सकेगा । ‘

आश्चर्य से भर उठी नीरा , उसका बेटा सचमुच अब बच्चा नहीं रहा । वह दूसरों के सपनों को पूरा करने वाला हो गया है । वह नाहक ही इतने अच्छे बच्चे पर शक कर रही थी । मन की सारी शंकाए छू – मंतर हो गई । वह मुस्कराते हुए ऑफिस से बाहर निकल गई । बहुत हल्का महसूस कर रही थी नीरा आज…।

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