Kapda ₹10 Kilometre

Kapda Rs 10 Kilometre कपड़ा 10 रुपए किलोमीटर – Hindi Story

[ हर वस्तु किलो में ही वज़नी और बड़ी होती है , बचपन की उस भोली समझ का क्या कहना ! ]

कपड़ा 10 रुपए किलोमीटर

– संदीप नारद

ह उस समय की बात है जब न तो टेलीविजन हुआ करता था न इंटरनेट था और न कोई मोबाइल को जानता था । हर बच्चा गर्मी की छुट्टियों का बेसब्री से इंतजार करता था । हम सब भाई बहन भी रायपुर से अपने नाना जी के घर दमोह जाने का इंतजार किया करते थे । साथ में जबलपुर से भी हमारे बाकी मौसेरे ममेरे भाई – बहन भी दमोह पहुंच जाते थे । उस समय दमोह में रविवार को बाजार भरा करता था । मामा जी की कपड़े की बड़ी दुकान थी । दुकान के ऊपर ही निवास हुआ करता था जिसकी गैलरी में खड़े होकर हम सब भाई बहन मार्केट का नजारा देखा करते थे ।

बाजार वाले दिन मामा जी की दुकान अपनी सीमा लांघकर सड़क तक आ जाती थी और तिरपाल पर मर्दाना धोतिया बिछाकर चिल्ला – चिल्लाकर , ममेरे भाई लोग ग्रामीण खरीददारों को आकर्षित किया करते थे । हमारे पापा और मौसाजी अधिकारी थे लिहाजा हम भाइयों में व्यवसाय करने या इस प्रकार माल बेचने को लेकर बहत उत्सकता रहा करती थी । मौका मिलते ही हम भाई लोग भी उस ‘ ग्राहक आकर्षित करो अभियान ‘ में शामिल हो जाया करते थे जहां तक मुझे याद आता है मामा जी हम लोगों के लिए एक सस्ते किस्म का कपड़ा रख दिया करते थे ताकि हम भी उसे बेच सकें और अपने अंदर की ‘ सेल्समेनशिप को संतुष्ट कर सकें । तभी हमारा मौसी का लड़का निप्पू नीचे आया और चिल्ला – चिल्लाकर बेचने लगा कि कपड़ाले लो 10 रुपए किलो – 10 रुपए किलो । ऊपर से जब ममेरे भाई ने देखा कि निप्पू भाई तो 10 रुपए किलो चिल्ला चिल्लाकर बेच रहे हैं तो उन्होंने ऊपर से जोर से बोलकर कहा कि 10 रुपए किलो नहीं , 10 रुपए मीटर बोलना है तो निप्पू भाई अब चिल्ला चिल्लाकर कह रहे थे कि कपड़ा ले लो 10 रुपए किलोमीटर – 10 रुपए किलोमीटर । हम सबको हंसी रुकते नहीं रुक रही थी । आज जब शीतला माता बाजार और कपड़ा मार्केट के बीच से निकला और दुकानों के सेल्समेनों को चिल्ला – चिल्लाकर ग्राहकों को अपनी ओर बलाना चाहा तो बरबस ही पुरानी याद ताजा हो गई ।

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