Apna Apna Dard Hindi Story

Apna Apna Dard अपना अपना दर्द – Hindi Story

[ प्रगति करने में विदेश गमन एक महत्वपूर्ण क़दम है। इससे बच्चे लाभान्वित होते हैं। उन्हें देश से क्या? ]

अपना अपना दर्द

– उमा महाजन

ति-पत्नी अपने बेटे और बहू के पास अमेरिका आए हुए हैं। अगले महीने उनकी बह उन्हें दादा-दादी का सुख प्रदान करने वाली है। वे दोनों भी बह की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। आखिर वर्षों की प्रतीक्षा के बाद यह शुभ घड़ी आई है वरना बच्चों के विदेश आ जाने के बाद वे दोनों तो अपने एकाकीपन से जूझते हुए मानो बुढ़ा ही गए थे। अपने एकाकीपन के लिए, अक्सर वे आपस में, और अपने मित्रों में भी, अपने देश के ‘प्रतिभा पलायन’ के लिए इन बच्चों की अति महत्त्वाकांक्षाओं को दोषी ठहराया करते थे। किंतु बहू के इस ‘फैमिली वे’ ने उनमें नए प्राण डाल दिए हैं। सुबह से शाम तक हंसते-हंसते व्यस्त रहने का एक मक़सद मिल गया है।

पिछले कुछ दिनों से उन लोगों के बीच नवागंतुक शिशु का ‘नाम चयन’ बातचीत का मुख्य विषय बना हुआ है। रोज ही बहू-बेटा अपनी ड्यूटी पर जाते समय उन्हें नाम ढूंढने का ‘होमवर्क’ दे जाते हैं परंतु रात को डाइनिंग टेबल पर उनके द्वारा, आपस में सांकेतिक भाषा में मुस्कराते हुए, कुछ न कुछ कारण देकर सारे नाम निरस्त कर दिए जाते हैं। कल हार कर आखिर उन्होंने बहू से पूछ ही लिया कि उन्हें क्यों कोई भी नाम पसंद नहीं आ रहा। वे तो कितना समय लगाकर ऐसे नाम देढती हैं जो यहां के प्रचलन के अनुसार हो, लेकिन बहू का तर्क सुनकर वे मर्मस्थल तक भीग गई, ‘ममा ! इसी संबंध में हम आज आपसे बात करने वाले थे। असल में हम चाहते हैं कि नाम में ‘इंडियन टच’ हो। यहां इन विदेशियों के बीच में रहते हुए केवल हमारे नाम ही तो हमारे अपने देश की पहचान हैं। यहां आना हमारी विवशता थी परंतु नाम से ही सही, हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहते हैं। ममा, जब कोई विदेशी सहयोगी कभी हमसे हमारे नाम का अर्थ पूछ लेता है तो अपने नाम से जुड़ी अपनी सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए बहुत गर्व महसूस होता है। हम आने वाले शिशु से भी उसका यह हक छीनना नहीं चाहते हैं।’

और वे सोच रहीं थीं कि ‘प्रतिभा पलायन’ का दर्द हमारा है और ये बच्चे खुश हैं? अपने देश से पलायन का दंश इन्हें भी कचोटता है और कैसे इन्होंने इस दर्द को समेट रखा है, यह तो कभी उन्होंने सोचा ही नहीं था।

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